मुसलमानों का पिछड़ापन, बेवकूफी, नादानी या धोका ?

मुसलमानों का पिछड़ापन, बेवकूफी, नादानी या धोका ?

मध्‍य और पश्चिम भारत के आठ राज्‍यों में केवल एक मुस्लिम मंत्री, 1553 सीटों से केवल 31 विधायक
आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे यूपी से केवल 23 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। इनमें से सरकार बनाने जा रही भाजपा से एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है।

उत्‍तर प्रदेश सहित देश के पांच राज्‍यों के चुनाव नतीजे 11 मार्च को सामने आ गए। भारतीय जनता पार्टी ने यूपी और उत्‍तराखंड में एकतरफा जीत दर्ज करते हुए सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही उसे मणिपुर में बड़ा फायदा हुआ है और वह शून्‍य से 21 पर पहुंच गई। कांग्रेस ने पंजाब में जोरदार वापसी की है। गोवा में भी वह सरकार बनाने के करीब है। लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल मुस्लिम प्रतिनिधित्‍व का खड़ा हुआ है। आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे यूपी से केवल 23 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। इनमें से सरकार बनाने जा रही भाजपा से एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है।


उत्‍तराखंड में भी भाजपा से एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है। इन चुनावों के मध्‍य और पश्चिम भारत के राज्‍यों में मुस्लिम समुदाय से केवल एक मंत्री है। साथ ही सत्‍तापक्ष की ओर से केवल तीन विधायक है। हालांकि विपक्षी दलों में 29 विधायक हैं। भाजपाशासित राज्‍यों में केवल राजस्‍थान ही जहां से कोई मुस्लिम मंत्री है। यहां से यूनुस खान केबिनेट मंत्री है। उनके अलावा वे अन्‍य विधायक भी भाजपा से आते हैं। इस तरह से 200 सीटों वाली राजस्‍थान विधानसभा में केवल दो मुस्लिम विधायक हैं। मध्‍य प्रदेश, गुजरात, छत्‍तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्‍ट्र, उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड से भाजपा से कोई मुस्लिम विधायक नहीं है।


राजस्‍थान और इन राज्‍यों में कुल मिलाकर 1553 विधानसभा सीटें हैं जिनमें केवल भाजपा से केवल दो मुस्लिम विधायक हैं। मध्‍य प्रदेश और उत्‍तराखंड से केवल एक मुस्लिम विधायक है और वह कांग्रेस से है। हरियाणा से दो मुसलमान विधायक हैं जो कि इनेलो के टिकट पर जीते हैं। इसी तरह से गुजरात में कांग्रेस से दो मुस्लिम विधायक हैं। महाराष्‍ट्र जहां पर भाजपा-शिवसेना की सरकार है वहां पर आठ मुस्लिम विधायक है। ये कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्‍तेहादुल मुसलिमीन से चुने गए हैं।


वहीं यूपी में इन चुनावों से पहले 1967 में भी 23 मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली थी। 2012-17 के चुनावों में सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक यूपी की विधानसभा में थे। उन दौरान उनकी संख्या 68 थी। इस बार सपा की ओर से 17 विधायक विधानसभा में पहुंचे हैं, जबकि बीएसपी के 4 मुस्लिम उम्मीदवार विधानसभा पहुंचे हैं। दो मुस्लिम विधायक कांग्रेस से चुने गए हैं।


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